उत्तराखंड

उत्तराखण्ड कांग्रेस ने 53 प्रत्याशियों की पहली सूची की जारी

देहरादून । उत्तराखण्ड कांग्रेस ने प्रत्याशियों की अपनी पहली सूची देर रात को घोषित कर दी है। कांग्रेस ने 53 प्रत्याशियों की सूची जारी की है।  पिता-पुत्र, यशपाल आर्य-संजीव आर्य को टिकट दे दिया गया। मतलब एक परिवार एक टिकट का सिद्धान्त तो कम से कम पार्टी का नहीं है। ऐसे में बीजेपी से आए हरक सिंह रावत और उनकी बहु अनुकृति गुसाईं की भी उम्मीदों की किरण जागती नजर आ रही। तथ्य ये भी है कि पार्टी ने अंतिम पलों में 65 की सूची में शामिल 12 नामों को रोक दिया और इसकी वजह सिर्फ अंदरखाने की कलह को माना जा रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ भुवन चन्द्र कापड़ी खटीमा में ताल ठोंकेंगे।

कांग्रेस उम्मीदवारो की सूची से जुड़ा अहम पहलू ये भी है कि 3 ऐसी सीटों पर भी पार्टी ने चेहरे घोषित नहीं किए, जिनको लेकर बवाल चल रहा। लैंसडाउन-डोईवाला और कैंट सीट को ले के काफी गहमागहमी चल रही। लैंसडाउन में अनुकृति के नाम की चर्चा लगातार सुर्खियां बनी हुई है। पार्टी ने टिकट न उनको न उनके ससुर और सुर्खियों के बेताज बादशाह हरक को ही दिया गया है। अब अगली सूची का इंतजार किया जा रहा था।

पार्टी नेतृत्व को इस बात का अंदेशा था कि सूची जल्दी घोषित करने पर दिन भर हंगामा रहता और दबाव का खेल चलता। आधी रात के बाद पहली सूची जारी होने से अब पार्टी के पास बवाल को झेलने के लिए सिर्फ एक दिन रविवार का रह गया है। सूची में हरक या उनकी बहु का नाम भी न होना चौंका गया। दोनों में से एक का नाम तो फाइनल है। फिर भी किसी का नाम घोषित न होने से ये भी संभावना शुरू हो गई है कि क्या पार्टी दोनों को टिकट दे सकती है ?
यशपाल और संजीव को टिकट देने के पीछे दो कारण माने जा रहे। एक तो उनसे बीजेपी छोड़ कांग्रेस में आते समय ही इसका वादा हो जाना और दूसरा दोनों के विजय की संभावना बहुत अधिक-होना।

विनिंग गेटिंग फॉर्मूला दोनों पर लागू हो सकता है। हरक और अनुकृति अगर काँग्रेस को वाकई जीतते हुए लगते हैं तब उनको इस फॉर्मूले से बाहर रखने की ठोस वजह शायद वह न दे पाए Winning & Getting  का सिद्धान्त उन पर भी लागू हो सकता है।
पार्टी ने उन सीटों पर नाम घोषित करने को तवज्जो दी, जहां किसी किस्म की कोई दिक्कत या झंझट नहीं था। पीसीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल (श्रीनगर), नेता विधायक दल प्रीतम सिंह (चकराता-एसटी), यशपाल आर्य (बाजपुर-एससी), संजीव आर्य (नैनीताल-एससी),गोविंद सिंह कुंजवाल (जागेश्वर), करण माहरा (रानीखेत), मयूख महर (पिथौरागढ़),नवप्रभात (विकासनगर), आर्येन्द्र शर्मा (सहसपुर),गोदावरी थापली (मसूरी), काजी निज़ामुद्दीन (मंगलौर), हरीश धामी (धारचूला), हीरा सिंह बिष्ट (रायपुर), सतपाल ब्रह्मचारी (हरिद्वार) और सुरेन्द्र सिंह नेगी (कोटद्वार) को ले के कोई अगर-मगर नहीं था।

ये रहस्य अभी भी बना हुआ है कि चुनावी रथ की रास थाम के आगे बढ़ रहे हरीश रावत चुनाव लड़ रहे हैं कि नहीं। पहली सूची से उनका नाम गायब है। सूची में नाम  रणजीत रावत का भी नहीं है, जिनको लेकर माना जाता है कि वह आज की तारीख में हरीश के कट्टर विरोधियों में हैं। ये भी समझा जा रहा है कि हरीश-रणजीत एक ही सीट रामनगर से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। बाजी किसके हाथ लगती है, ये कहना अभी जल्दबाज़ी होगी। हरीश रावत चाहेंगे तो उनका टिकट तो हो जाएगा लेकिन वह रणजीत की इच्छा के बगैर उसी सीट से उतरना पसंद करेंगे या नहीं, ये देखना अहम होगा।
उनके पास सीटों का विकल्प और भी है। वह डोईवाला-कैंट से भी लड़ लेते हैं,तो भी उनको दिक्कत नहीं है। लाल कुआं भी एक और विकल्प है। काँग्रेस ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ पुराने आजमाए कारतूस भुवन कापड़ी को फिर निशाना लगाने की ज़िम्मेदारी सौंपी है। वह पिछली बार भी खटीमा की जंग पुष्कर के खिलाफ गंवा बैठे थे। इस बार पुष्कर कहीं अधिक मजबूत माने जा रहे।

सूत्रों के हवाले से खबर यह है कि गुटबाजी के चलते काँग्रेस हाई कमान भी परेशान और संशय में है। इसके चलते पूरी और जल्दी सूची जारी करने में वह हिचक रहा। पहली सूची में शामिल कई नामों को पुनर्विचार के लिए रोकना और आधी रात के बाद उसको जारी करने के पीछे भी यही कारण रहा। पार्टी में अभी से मुख्यमंत्री बनने को ले के लड़ाई छिड़ चुकी है। इसका खामियाजा पार्टी को चुनाव में भी भुगतना पड़ सकता है।

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