उत्तराखंड

उत्तराखंड में पलायन को रोकने के लिए वैज्ञानिक तरीके से बनाई जाए व्यापक कार्य योजना – मुख्यमंत्री

रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में बढ़ रहा है
लोगों का रूझान

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पलायन को रोकने के लिए वैज्ञानिक तरीके से व्यापक कार्य योजना बनाई जाए। पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों की आजीविका में तेजी से वृद्धि हो उसके लिए भी व्यापक स्तर पर कार्य योजनाएं बनानी होंगी। सरकार द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों में लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों की आजीविका वृद्धि के साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के लिए निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। उद्योग, पर्यटन, कृषि, बागवानी को बढ़ावा देने के लिए निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग रिवर्स पलायन कर राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार के साथ ही अन्य लोगों को भी स्वरोजगार से जोड़ रहे हैं, ऐसे लोगों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को रोकने के लिए गांवों पर केन्द्रित योजनाओं पर विशेष ध्यान दिये जाने की जरूरत बतायी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के संसाधन बढ़ाने और अवस्थापना विकास से संबंधित केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का आम जन को पूरा लाभ मिले।
ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एस. एस. नेगी ने कहा कि आयोग द्वारा अब तक 19 रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत की जा चुकी हैं। उधमसिंह नगर जनपद की रिपोर्ट भी जल्द सौंपी जायेगी। उन्होंने कहा कि लोगों का रूझान रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में बढ़ रहा है। ग्राम्य विकास और पलायन निवारण आयोग के सदस्य दिनेश रावत ने सुझाव दिया कि राज्य में कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए फसलों को जंगली जानवरों से बचाव के लिए सुरक्षात्मक उपाय करने होंगे। सीएम सौर स्वरोजगार योजना को राज्य में और बढ़ावा देना होगा। सदस्य सुरेश सुयाल ने सुझाव दिया कि गांवों में किसान उत्पादक संगठनों (एफ.पी.ओ)को बढ़ावा देना होगा। पर्वतीय क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं को अधिक से अधिक स्वरोजगार से जोड़ना होगा। राम प्रकाश पैन्यूली ने सुझाव दिया कि चारधाम यात्रा मार्गों पर प्रचीन मंदिरों को भी जोड़ने की जरूरत है, इससे धार्मिक पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर लोगों की आजीविका भी बढ़ेगी। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में नोडल अधिकारी बनाने होंगे। रंजना रावत ने सुझाव दिया कि पर्वतीय क्षेत्रों में एमएसएमई को और बढ़ावा देना होगा। कृषकों को समय पर उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध हों, यदि वे कहीं बाहर से भी उच्च गुणवत्ता युक्त बीज ले रहे हो, तो उन्हें इसके लिए सब्सिडी समय पर मिल जाए। अनिल शाही ने कहा कि गांवों को केन्द्र मानकर विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास करने होंगे। सीमान्त क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए सीमान्त दर्शन योजना शुरू करने की दिशा में विचार करना होगा।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव बी.वी.आर. सी. पुरूषोत्तम, अपर सचिव नीतिका खण्डेलवाल उपस्थित थे।

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